अजमेर: नाबालिग से रेप मामले में सरकारी डॉक्टर और ई-मित्र संचालक गिरफ्तार
भरोसा करने से पहले सावधान!
राजस्थान के अजमेर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता और विश्वास को शर्मसार कर दिया है। एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर और एक ई-मित्र संचालक ने मिलकर एक नाबालिग बच्ची को अपनी हवस और ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
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अस्पताल से शुरू हुआ जुर्म का सिलसिला
घटना की शुरुआत अजमेर के जनाना अस्पताल से हुई। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता की भाभी की डिलीवरी के दौरान नाबालिग बच्ची उनकी देखभाल के लिए अस्पताल में रुकी थी। वहां तैनात आरोपी डॉ. कैलाश कुमार जीनगर (32) ने बच्ची को अपनी बातों के जाल में फंसाया और उसका मोबाइल नंबर ले लिया।
डॉक्टर ने दोस्ती का दिखावा किया और 14 फरवरी 2025 को घुमाने के बहाने नाबालिग को एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना लिए। इन्ही वीडियो के दम पर आरोपी डॉक्टर उसे बार-बार ब्लैकमेल कर 8-10 बार रेप करता रहा।
मदद के नाम पर ई-मित्र संचालक ने भी लूटी अस्मत
जब नाबालिग इस दलदल से निकलने के लिए छटपटा रही थी, तो उसने अपने परिचित एक ई-मित्र संचालक को अपनी आपबीती सुनाई। उसे लगा कि शायद ई-मित्र चलाने वाला यह युवक उसकी मदद करेगा, लेकिन यहाँ भी उसे धोखा ही मिला।
ई-मित्र संचालक ने मदद करने और डॉक्टर के चंगुल से छुड़ाने का झूठा वादा किया। वह नाबालिग को होटल ले गया और वहां उसके साथ जबरदस्ती रेप किया। विरोध करने पर उसने भी बदनामी का डर दिखाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, ई-मित्र संचालक ने भी नाबालिग के साथ 6 बार होटल में ले जाकर दरिंदगी की।
कैसे खुला इस काली करतूत का राज?
10 अप्रैल को जब पीड़िता की बड़ी बहन ने उसके शरीर पर चोट के निशान देखे, तो उसने सख्ती से पूछताछ की। बहन के सामने नाबालिग फूट-फूटकर रोने लगी और अपनी पूरी आपबीती सुनाई। 11 अप्रैल 2026 को थाने में मामला दर्ज कराया गया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।
ई-मित्र संचालकों और नागरिकों के लिए सबक
यह घटना हमें सिखाती है कि चाहे कोई कितना भी पढ़ा-लिखा (डॉक्टर) हो या परिचित (ई-मित्र संचालक), आँख बंद करके किसी पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है।
- अभिभावक ध्यान दें: अपने बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों और उनके शरीर पर चोट के निशानों को नजरअंदाज न करें।
- बच्चे और युवा: किसी भी प्रकार की ब्लैकमेलिंग होने पर डरे नहीं, तुरंत अपने परिवार या पुलिस को सूचित करें।
निष्कर्ष: अपराधी का कोई पेशा नहीं होता
एक डॉक्टर जिसका काम जान बचाना है और एक ई-मित्र संचालक जिसे समाज में सेवा का केंद्र माना जाता है, जब ऐसे घिनौने कृत्यों में शामिल होते हैं, तो पूरे सिस्टम पर सवाल उठते हैं। राजस्थान पुलिस की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है और उम्मीद है कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
जरूरी जानकारी और मदद
अगर आप या आपके आसपास कोई भी ऐसी स्थिति में है, तो चुप न रहें। मदद के लिए यहाँ संपर्क करें:
Child Helpline: 1098
Cyber Crime Helpline: 1930
Police Help: 100 / 112
आधिकारिक शिकायत पोर्टल:
cybercrime.gov.in

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