ई-मित्र संचालक सावधान! बैंक खाता किराए पर दिया तो होगी जेल: जानें 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' की पूरी कहानी
राजस्थान में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। अगर आप एक ई-मित्र संचालक हैं या आम नागरिक, और एक्स्ट्रा इनकम के लालच में अपना बैंक अकाउंट किसी और को इस्तेमाल करने के लिए देते हैं, तो यह खबर आपकी रातों की नींद उड़ा सकती है। राजस्थान पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' (Operation Mule Hunter) अब ऐसे लोगों को सीधे जेल भेज रहा है।
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क्या है 'ऑपरेशन म्यूल हंटर'?
राजस्थान पुलिस द्वारा शुरू किया गया यह एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ना है। अक्सर साइबर अपराधी ठगी का पैसा सीधे अपने खाते में न मंगाकर, मासूम लोगों या ई-मित्र संचालकों के खातों का इस्तेमाल करते हैं। इस ऑपरेशन के तहत अब खाता धारक पर भी उतनी ही कड़ी कार्रवाई की जा रही है जितनी ठग पर।
म्यूल अकाउंट (Mule Account) किसे कहते हैं?
म्यूल का मतलब होता है खच्चर — जैसे खच्चर दूसरों का बोझ ढोता है, उसी तरह कुछ लोग अपना बैंक खाता साइबर ठगों को किराए पर दे देते हैं ताकि ठगी का पैसा इधर-उधर घुमाया जा सके। ऐसे खातों को बैंकिंग भाषा में "म्यूल अकाउंट" कहा जाता है — जो फाइनेंशियल फ्रॉड में ठगी के पैसे इधर से उधर करने में मदद करते हैं।बैंकिंग और साइबर सुरक्षा की भाषा में 'म्यूल' का अर्थ होता है वह खाता, जिसका उपयोग अवैध धन (Ill-gotten money) को छुपाने या ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ठग अक्सर ई-मित्र संचालकों को कुछ प्रतिशत कमीशन का लालच देकर उनके खाते, UPI आईडी या QR कोड का इस्तेमाल करते हैं।
राजस्थान में बड़ी कार्रवाइयां: सीकर और जोधपुर के मामले
'ऑपरेशन म्यूल हंटर' के तहत प्रदेश भर में गिरफ्तारियां शुरू हो चुकी हैं:
- सीकर (22 अप्रैल 2026): खाटूश्यामजी पुलिस ने नागरमल और सुभाषचंद नामक व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया। इनके खातों में कर्नाटक से साइबर फ्रॉड के लाखों रुपए आए थे।
- जोधपुर: बासनी थाना पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया जिन्होंने कमीशन के चक्कर में अपनी सिम और बैंक खाते ठगों को सौंप दिए थे। जांच में ₹29.91 लाख की ठगी का खुलासा हुआ है।
ई-मित्र ऑपरेटरों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
ई-मित्र संचालकों के पास बैंकिंग सेवाओं का एक्सेस होता है, जिससे वे ठगों के आसान टारगेट बन जाते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए इन बातों का पालन अनिवार्य है:
- अपना QR कोड सुरक्षित रखें: दुकान पर लगा QR कोड या UPI आईडी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ डिजिटल माध्यम से साझा न करें।
- किराये पर खाता न दें: महीने के फिक्स कमीशन के लालच में अपना डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग एक्सेस किसी को न सौंपें।
- संदिग्ध ट्रांजेक्शन: यदि आपके खाते में अचानक बड़ी राशि आती है जिसकी आपको जानकारी नहीं है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें।
- सिम कार्ड की सुरक्षा: अपनी रजिस्टर्ड मोबाइल सिम किसी और को चलाने के लिए न दें।
कानून के शिकंजे में फंसे तो क्या होगा?
साइबर अपराध में सहयोग देना (चाहे अनजाने में हो) आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है:
- IT एक्ट की धाराओं में FIR: आपके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा।
- खाता फ्रीज: आपका बैंक खाता तुरंत सीज कर दिया जाएगा, जिससे आपकी जमा राशि फंस जाएगी।
- पुलिस गिरफ्तारी: इस मामले में जमानत मिलना भी कठिन हो जाता है।
साइबर फ्रॉड की शिकायत कहाँ करें?
यदि आप या आपका कोई परिचित साइबर ठगी का शिकार होता है, तो बिना देरी किए निम्नलिखित कदम उठाएं:
- हेल्पलाइन नंबर: तुरंत 1930 पर कॉल करें।
- ऑनलाइन पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/ पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
- निष्कर्ष: ई-मित्र संचालक समाज की सेवा का केंद्र हैं। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता आपको और आपके परिवार को कानूनी पचड़ों से बचा सकती है। "सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।"
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